Ishq ghazal
Ishq ghazal

इश्क़ बस एक बार होता है

( Ishq bas ek baar hota hai )

 

इश्क़ बस एक बार होता है
कुछ दिनों का ही यार होता है

 

रात दिन याद है सताती फिर
रात दिन इंतज़ार होता है

 

इश्क़ में कब किसे मिली खुशियां
इश्क बस अश्कबार होता है

 

आपको क्या पता हक़ीक़त का
फूल बनकर ये खार होता है

 

इसका मौसम खिजां की मानिंद है
कौन कहता बहार होता है

 

इसकी नजरों से कौन बच पाया
इश्क़ है इश्क़,यार होता है

 

प्यार की बारिशें नही होती
आंसुओं की फुहार होता है

 

फर्ज़ है कर्ज़ को अदा करना
इश्क़ ‘फैसल’ उधार होता है

 

 

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शायर: शाह फ़ैसल

( सहारनपुर )

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