Pagal Bhojpuri kavita

पागल | Pagal Bhojpuri kavita

” पागल “

( Pagal ) 

 

दरद के आग बा ओके दिल में, रोये ला दिन रात
देख- देख के लोग कहेला, पागल जाता बडबडात

 

रहे उ सिधा साधा, माने सबके बात
लूट लेलक दुनिया ओके, कह के आपन जात

 

आज ना कवनो बेटा-बेटी, नाही कवनो जमात
नाही पाकिट में एगो रोपया, रहे कबो अफरात

 

रहे उ अन्याय के विरोधी, हर दम क‌इलक इंसाफ
नाही कबो केहू से डरें उ, मुंह पे करें बात

 

इ चिज़ ना दुनिया के भाइल, देलक अ्इसन मार
चोट ओके अ्इसन लागल, घुमेला पगलात ।

 

कवि – उदय शंकर “प्रसाद”
पूर्व सहायक प्रोफेसर (फ्रेंच विभाग), तमिलनाडु

??

उपरोक्त कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे
यह भी पढ़ें:-

मजबूर | Bhojpuri kavita majboor

 

 

 

 

 

Similar Posts

  • ताक द हम पे हे भगवान | Hey Bhagwan Bhojpuri Kavita

    ताक द हम पे हे भगवान ( Taak da hum pe hey Bhagwan )    अब उब गईल बानी इ जिंदगी से कहवा बा तोहर ध्यान हम अग्यानी, मुरख, बेचारा ताक द हम पे हे भगवान हर जगह बा तोहर ठिकाना हम में बसल बा तोहर प्राण तोहर इसारा बिना ना हिले तिनका तिनका न…

  • रोपया | Poem on rupees in Bhojpuri

    ” रोपया “ ( Ropya )    रोपया के ना कवनो जात जे के ज्यादा उहे बाप उहे दादा उहे भाई चाहे हो क‌ईसनो कमाई रोपया से समान मिलेला जित धरम अउर शान मिलेला रोपया से सब कुछ खरीदाला कोट कचहरी अउर न्याय बिकाला रोपया में बा अ्इसन बात रोपया के ना कवनो जात रोपया…

  • हडिया | Haria Bhojpuri Kahani

    ” हडिया ” ( Haria )  एगो गांव में एगो लड़की रहे उ बहुत सुन्दर रहे लेकिन उ बहुत झगडाईन रहे । गांव के सारा लोग ओकरा से परेशान रहे। रोज-रोज उ केहु ना केहु से झगड़ा फंसा लेत रहे । ओके घर वाला लोग भी बहुत परेशान रहे ओके ठिक करेके सारा उपाय अपना…

  • जरल | Jaral Bhojpuri kavita

    ” जरल “ ( Jaral )    पहिले अपना के झांक तब दुसरा के ताक काहे तु हसतारे कवन कमी तु ढकतारे घुट-घुट के मरतारे दुसरा से जरतारे तोहरों में बा कुछ अच्छा ज्ञान खोज निकाल अउर अपना के पहचान मेहनत के बल पे आगे बढ़ जवन कमी बा ओकरा पुरा कर ना कर सकेले…

  • गिर के उठनी | Bhojpuri Kavita Gir ke Uthani

    ” गिर के उठनी “ ( Gir ke uthani )   आज उठे के समय हमरा मिलल देख हमरा के कवनो जल उठल खिंच देलक गोंड हमर ऐ तरह से गिर ग‌इनी देख दुनिया हंस पड़ल का करती हम अभीन उठल रहनी मंजिल रहे दूर मगर अब ना सुतल रहनी देख इ हंसी अब हम…

  • उड़त बा रंगवाँ | Urat ba Rangwa

    उड़त बा रंगवाँ ( Urat ba Rangwa )    उठावा न साया घड़ी-घड़ी, उड़त बा रंगवाँ गली-गली। तोड़ा न सिग्नल,न तोड़ा कली, उड़त बा रंगवाँ गली-गली। (2) गमकत बा तोहरो ई फुलवा की क्यारी, लाल-लाल हुई मिट्टी,लाल हुई साड़ी। लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी, लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी। भरी पिचकारी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *