• संसार न होता | Kavita Sansar na Hota

    संसार न होता….! ( Sansar na hota )   मन का चाहा यदि मिल जाता, तो फिर यह संसार न होता। हार न होती, जीत न होती, सुख दु:ख का व्यापार न होता। रोग-शोक-संताप न होता, लगा पुण्य से पाप न होता। क्यों छलकाते अश्रु नयन ये, जो उर में परिताप न होता। स्नेह स्वार्थ…

  • व्यथा | Kavita Vyatha

    व्यथा ( Vyatha )   बरसों के अथक परिश्रम का ऐसा हमें फलसफा मिला, न सम्मानित कोई पदवी मिली न ही कोई नफा मिला। दबाया कुचला हमें सबने जैसा जिसका मन किया, कभी अपमानित कभी प्रताड़ित जिसने जब चाहा किया। अब किससे हम विनय करें किसके जा चरण धरें, सारे निवेदन व्यर्थ हुए और अब…

  • मतदान करें | Nazm Matdan Karo

    मतदान करें ( Matdan Karen ) ( 2 ) कोई नफरत की हवा न दो, चलो मतदान करें, पुरानी राख न कुरेदो, चलो मतदान करें। नया ख्वाब, नया भारत, नया मौसम है आया, गूँज रहे हैं फिजाओं में नारे,चलो मतदान करें। बदले की आग जला न दे तेरे मन का नक्शा, खता, वफ़ा, अदावत छोड़,चलो…

  • नयनों के तारे आजा | Naino ke Tare Aaja

    नयनों के तारे आजा ( Naino ke Tare Aaja )   नयनो के तारे आजा, बुढ़ापे के सहारे आजा। दूध का कर्ज चुकाने, बेटे फर्ज निभाने आजा। नयनो के तारे आजा खूब पढ़ाया तुमको, लाड लडाया तुमको। अंगुली पकड़कर, चलना सिखाया तुमको। तुतलाती बोली प्यारी, शीश झुकाने आजा। ताक रही आंखें रस्ता, झलक दिखाने आजा।…

  • भगवान सिर्फ लकीरें देता है | Kavita Bhagwan Sirf

    भगवान सिर्फ लकीरें देता है ( Bhagwan sirf lakeeren deta hai )   भगवान सिर्फ लकीरें देता है, रंग हमें भरने होते हैं। इस धरती पर हर इंसा को, शुभ कर्म करने होते हैं। कदम कदम पे तूफानों से, संघर्षों से लड़ना होता है। अपनी मेहनत के दम पर, कीर्तिमान गढ़ना होता है। रंग बदलती…

  • एहसास तेरा प्यारा | Poem Ehsaas Tera Pyar

    एहसास तेरा प्यारा ( Ehsaas Tera Pyar )   जाने क्यों दिल को लगता, एहसास तेरा प्यारा। बज उठते तार दिल के, बोले मन का इकतारा। क्यों ख्वाबों में चेहरा ये, मुस्कानों के मोती सा। नैनों में झलक आता, विश्वास दिव्य ज्योति सा। सुर संगीत की तुम मधुर, दिव्य धारा लगती हो। छेड़े वीणा के…

  • ये दुखदाई है | Ghazal Ye Dukhdai Hai

    ये दुखदाई है ( Ye Dukhdai Hai )   आसमां छूती मेरे मुल्क़ में मँहगाई है मुफ़लिसों के लिए अब दौर ये दुखदाई है सींचते ख़ून पसीने से वो खेती अपनी उन किसानों के भले पाँव में बेवाई है साँस लेना हुआ दुश्वार तेरी दुनिया में अब तो पैसों में यहाँ बिक रही पुरवाई है…

  • त्राहिमाम | Kavita Trahimam

    त्राहिमाम ( Trahimam )   प्रकृति विकृति समाया चलो इसे उबारें उमस गहन छाया चलो आंधियां लाएं सन्नाटा सघन पसरा चलो चुप्पिया॔ तोड़ें चित्कारें चरम छूती चलो चैतन्य पुकारें प्रचंड प्रलय आया चलो गीत-मीत गाएं बेसुध कराहे बसुधा चले पीयूष पिलायें मानव बना दुर्वासा चलो मनुज बनाएं स्याह सबेरा दिखता चलो सोनल चमकायें मन असुरी…

  • अणु से संपूर्ण | Kavita Anu se Sampurn

    अणु से संपूर्ण ( Anu se Sampurn )   तू बूंद से कर प्रयाण सागर का सागर भी मिल जाता महासागर में हो मुक्त आवागमन के बंधन चक्र से ब्यर्थ है मोह इस झूठे संसार से अणु कण से हि बना यह रूप मनोहर तब अणु श्रोत की छवि होगी कैसी मिल जाना ही है…

  • खाली | Kavita Khali

    खाली ( Khali )   गगन को छु रही आज की इमारतें, मगर…इंसान हुआ ज़मीन-बोश है, इन इमारतों में ढूंढता वजूद अपना, वो क्या जाने सब कर्मों का दोष है, ईंट पत्थरों पर इतराता यह इंसान, है कुदरत के इंसाफ से ये अनजान, जब पड़ती उसकी बे-आवाज़ मार, पछताता रह जाता फिर ये नादान, जब…