त्राहिमाम

त्राहिमाम | Kavita Trahimam

त्राहिमाम

( Trahimam )

 

प्रकृति विकृति समाया
चलो इसे उबारें
उमस गहन छाया
चलो आंधियां लाएं
सन्नाटा सघन पसरा
चलो चुप्पिया॔ तोड़ें
चित्कारें चरम छूती
चलो चैतन्य पुकारें
प्रचंड प्रलय आया
चलो गीत-मीत गाएं
बेसुध कराहे बसुधा
चले पीयूष पिलायें
मानव बना दुर्वासा
चलो मनुज बनाएं
स्याह सबेरा दिखता
चलो सोनल चमकायें
मन असुरी घिरा
चलो मयूरी नचायें

Shekhar Kumar Srivastava

शेखर कुमार श्रीवास्तव
दरभंगा( बिहार)

यह भी पढ़ें :-

मोबाईल की महिमा | Kavita Mobile ki Mahima

Similar Posts

  • मुस्कुराना चाहिए | Muskurana chahiye | Kavita

    मुस्कुराना चाहिए ( Muskurana chahiye )   गीत कोई प्यारा लगे तो गुनगुनाना चाहिए। देख कोई अपना लगे तो मुस्कुराना चाहिए।   प्यार में शर्ते नहीं संबंध निभाना चाहिए। हंसकर सबसे मिले प्रेम जताना चाहिए।   अपनापन अनमोल मोती खूब लूटाना चाहिए। पल दो पल हमको भी सदा मुस्कुराना चाहिए।   आंधी तूफान आते जाते…

  • पवित्र शंख | Shankh par kavita

    पवित्र शंख ( Pavitra shankh )      जगतपिता नारायण रखते जिसको अपने हाथ, आओ करें आज हम उस पवित्र शंख की बात। इसी शंख में होता है देवी लक्ष्मी-मैया का वास, जिससे जुड़ी है महत्वपूर्ण और कई सारी बात।।   इसको घर में रखना भी बहुत शुभ माना जाता, फूॅंक मारकर तीन-बार बजाया जिसको…

  • कृष्ण कुमार निर्माण की कविताएं | Krishan Kumar Nirman Poetry

    बस,अब और नहीं बस,अब और नहीं,,तुम छिप जाओ,जाकर कहीं…बादलों की ओट में,,,क्योंकि….मुझसे सहन नहीं होताये व्यवहार तुम्हाराऔर तुम हो कि…प्यार के नाम परमुखौटे पर मुखौटे लगाकरप्रतिपल छल रहे हो मुझेऔर…साबित कर रहे होकि… तुम बेवफा होआखिर क्यों कर रहे हो तुम ऐसा…जाओ,छिप जाओकहीं बादलों की ओट में… उल्लू के पठ्ठे जी हाँ,,सबके पठ्ठे होते हैंजैसे…

  • हताश जिन्दगी | Hataash Zindagi

    हताश जिन्दगी ( Hataash zindagi )  देखा है हमने अक्सर हताश जिन्दगी। हमने भी नही पाई कुछ ख़ास जिन्दगी।। बे-मौत मर रहे हैं हजारों यहाॅं वहाॅं, क्यूॅं आती नही है फिर भी,ये रास जिन्दगी, आकर कोई बताये,ये कैसा फ़लसफ़ा है, दिखती है कभी दूर कभी पास जिन्दगी। ऊपर ख़ुदा है रोशन,मैं झूठ न कहूॅं, जम्मे-ग़फ़ीर…

  • परीक्षा का डर कैसा | Kavita Pariksha ka Dar

    परीक्षा का डर कैसा   लो परीक्षाएं आ गई सर पर अब कर लो तैयारी। देने हैं पेपर हमको प्रश्नों की झड़ियां बरसे भारी। घबराहट कैसी संकोच छोड़े परीक्षा से डर कैसा। पढ़ाई हमने भी की माहौल ना देखा कभी ऐसा। विनय भाव धारण कर नियमित पढ़ते जाएं। विषय बिंदु पर ध्यान केंद्रित आगे बढ़ते…

  • एक स्त्री क्या चाहती है

    ” जानते हो एक स्त्री क्या चाहती है?” सम्मान और स्वाभिमान के साथ, समाज में सर उठाकर जीना…..। उसकी सहमति से उसके तन मन, पर अपना अधिकार जमाना …..। उसके सम्मान को ना ठेस पहुंचाये , उसे केवल भोग की वस्तु न मानें, उसके अस्तित्व को तार तार न करें…..। वह नहीं चाहती कि उसकी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *