Ghazal Zindagi Badrang Hai

ज़िंदगी बदरंग है | Ghazal Zindagi Badrang Hai

ज़िंदगी बदरंग है

( Zindagi Badrang Hai )

 

नफ़रतों से प्यार की अब जंग है
हर ख़ुशी से ज़िंदगी बदरंग है

अंजुमन में कुछ हुआ ऐसा यहाँ
देखके ही रह गया दिल दंग है

ख़ाक कर दे दुश्मनों को ए ख़ुदा
कर रहा जो मुफलिसों को तंग है

अंजुमन में कर रहा वो फ़ासिला
दो घड़ी बैठा नहीं वो संग है

दुश्मनी के मार पत्थर वो गया
कब लगाया प्यार का जो रंग है

तल्ख़ लहज़े से भरी उसकी ज़ुबाँ
प्यार का लब पे नहीं आहंग है

कर गयी है फ़ासिला जब से ख़ुशी
ज़िंदगी का चैन आज़म भंग है

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

अक्ल नहीं है | Ghazal Akal Nahi Hai

Similar Posts

  • हम दिल से हारे | Hum Dil se Hare

    हम दिल से हारे ( Hum Dil se Hare )   दुनिया को देखने का अपना नुक़्ता-ए-नज़र है मेरा, मोम के लिए मोम हूँ वरना हर लफ़्ज़ खंजर है मेरा, हम दिल से हारे दिमाग़ करता ना ऐसी बेवकूफ़ियाँ, रिश्ते निभाने की ख़ातिर ज़िंदगी हुआ ज़हर है मेरा, मोहब्बतों की..बेपनाह गुल खिलाने की आरज़ू थी,…

  • वैभव असद अकबराबादी की ग़ज़लें | Vaibhav Asad Poetry

    फ़िर वही सब किया तो सुन बैठे फ़िर वही सब किया तो सुन बैठेइक परी-रू के ख़्वाब बुन बैठे उसकी पायल की छनछनाहट यारसाज़ पर किस तरह ये धुन बैठे साफ़ सुधरी सी ज़िंदगी जीनाबड़ी कमबख़्त राह चुन बैठे इश्क़ वालों को इश्क़ से मतलबउनको क्या करना कितने गुन बैठे मुस्कुराए तो खिल उठे क़िस्मतरूठ…

  • बिन तेरे | Bin Tere

    बिन तेरे बिन तेरे मुझे आज भी जीना नहीं आया।बैरी सा लगे अब तो मुझे अपना ही साया।। कोशिश तो बहुत कर ली  भुलाने की तुम्हें  पर,इक तेरे सिवा दूजा कोई  दिल को न भाया।। कैसे मिले राहत मिरे टूटे हुए दिल को,कोशिश तो  मेरी हो गई जब सारी ही  ज़ाया।। हम आस लिए बैठे…

  • मेरी तनहाई | Meri Tanhai

    मेरी तनहाई ( Meri Tanhai ) दिल के अन्दर है मेरी तनहाईगहरा सागर है मेरी तनहाई क़द्रो-क़ीमत न कोई अश्कों कीजैसे पत्थर है मेरी तनहाई हो ज़माना भले सितमगर यहइक सिकंदर है मेरी तनहाई वो उजाला करे उदासी मेंइक दिवाकर है मेरी तनहाई यादें तेरी अगर हैं नश्तर सीमेरी दिलबर हैं मेरी तनहाई ओढ़ती और…

  • कम समझता है | Kam Samajhta hai

    कम समझता है ( Kam samajhta hai )   दिलों की बात क्यूं जाने वो अक्सर कम समझता है मेरी फितरत है शोला सी मुझे शबनम समझता है। मुझे डर है कि उसका ज़ख़्म मत नासूर बन जाए वो पगला दोस्तों को ज़ख़्म का मरहम समझता है। जरा इंसान की नाशुक़्रियों पर गौर करिए तो…

  • ताजदार करना है

    ताजदार करना है वफ़ा की राह को यूँ ख़ुशग़वार करना हैज़माने भर में तुझे ताजदार करना है भरम भी प्यार का दिल में शुमार करना हैसफ़ेद झूठ पे यूँ ऐतबार करना है बदल बदल के वो यूँ पैरहन निकलते हैंकिसी तरह से हमारा शिकार करना है ये बार बार न करिये भी बात जाने कीअभी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *