Kavita Shaheed Diwas

शहीद दिवस | Kavita Shaheed Diwas

शहीद दिवस

( Shaheed Diwas )

फांसी के फंदे से,आजादी का सिंहनाद

तेईस मार्च उन्नीस सौ इक्कतीस,
दिवस अद्भुत मोहक सोहक ।
उमंग उल्लास प्रकृति पटल,
कायिक प्रभा अनंत रोहक ।
असीम नमन दिव्य बलिवेदी,
हिय हिलोरित राष्ट्र प्रेम निर्बाध ।
फांसी के फंदे से, आजादी का सिंहनाद ।।

आत्मविश्वासी अभय कदम,
चाल ढाल रण बांकुरी ।
अप्रतिम मातृभूमि अनुपमा,
रंग बासंती धुन बांसुरी ।
उत्सर्ग उत्कंठा अपार धार,
अभिव्यक्ति अंतर देश संवाद ।
फांसी के फंदे से, आजादी का सिंहनाद ।।

मां भारती रज रज अंतस्थ,
सरित प्रवाह अनंत उजास ।
वीर वंदन अभिनंदन बेला,
स्वतंत्रता हित सार्थक प्रयास ।
हिन्द आभा तद कालखंड,
चहुँ ओर आजादी उन्माद ।
फांसी के फंदे से, आजादी का सिंहनाद ।।

महामृत्युंजय स्वरिका संग,
ध्येय रक्षा राष्ट्र स्वाभिमान ।
सहर्ष वरण अवसान बिंदु,
चाह राह हिंद मुस्कान ।
स्मृति प्रभा जननी जन्म धरा,
फांसी सह प्रणय आह्लाद ।
फांसी के फंदे से, आजादी का सिंहनाद ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/kavita-jal-hai-to-kal-hai/

Similar Posts

  • कृष्ण बाल लीला | Krishna Bal Leela

    कृष्ण बाल लीला! ( Krishna Bal Leela )    खेलत गेंद गिरी यमुना-जल,कूद पड़े श्री कृष्ण कन्हैया। गोकुल गाँव में शोर मचा ,दौड़ के आई यशोदा मैया। ग्वालों के होश उड़े यमुना तट,कैसे बचेंगे कृष्ण कन्हैया। बांके बिहारी, ब्रह्मांड मुरारी,को नाग के ऊपर देखी मैया। गोंदी में आ जा मेरे कन्हैया,कहने लगे नन्द बाबा औ…

  • कृष्ण अवतारी | Krishna Avtari

    कृष्ण अवतारी ( Krishna avtari )    कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि प्यारी विष्णु बने कृष्ण रूप अवतारी वासुदेव देवकी सुत वो कहलाए बाबा नंद यशोदा घर बचपन पाए नटखट श्याम हुए गोवर्धन गिरिधारी दधी माखन की किए लीला प्यारी आगे आगे भाग रहे देखो कृष्ण मुरारी पीछे पीछे भागे मात यशोदा बेचारी ग्वाल बाल संग…

  • हृदय की पीर लेखनी | Lekhni par kavita

    हृदय की पीर लेखनी ( Hrdaya ki peer lekhni )    जब हृदय की पीर कागज पे भावों से बहकर आती है कलम की धार बने कविता दिल को बहुत लुभाती है   ओज प्रेम करुणा बरसती शब्द सुरीले प्यारे-प्यारे कुदरत करे श्रंगार अगणित कलम के बहते धारे   देशभक्ति राष्ट्रप्रेम की अलख जगाती रही…

  • जीयो जीने दो | Jiyo Jeene Do

    जीयो जीने दो ( Jiyo Jeene Do )   बैठ बलाओं से यूँ मत थक हार कर ज़ीस्त नदी है इसको तिरकर पार कर ख़ुद भी जीयो जीने दो औरों को भी क्या होगा उपलब्ध किसी को मार कर क्या खोया क्या पाया पूरे रोज़ में रोज़ ज़रा सा सोते वक़्त विचार कर सोई हैं…

  • चांदनी | Chandni

    चांदनी ( Chandni )    पूनम के चांद से सब कतराने लगे अमावस की चांदनी मे नहाने लगे जलने लगी है अब उन्हे सूरज की धूप हैलोजन की फ्लैश मे ही नचाने लगे रंगीन बालों मे ही दिखती है जवानी बूढ़े भी अब तो सिर मे विग लगाने लगे युवतियों के कपड़े उतारने लगे तन…

  • बदलने से | Badalne se

    बदलने से हमको परहेज़ है साहब कहाँ बदलने से।कुछ न बदलेगा मगर बस यहाँ बदलने से। बात कोई नहींं करता वहाँ बदलने कीहम बदल सकते हैं सचमुच जहाँ बदलने से। न दिल, न जज़्बा, न लहजा, न नज़रिया, न नज़रकुछ बदलता नहीं है चेहरा बदलने से। सर झुकाने के तरीके के सिवा क्या बदलादिल बदलता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *