कविताएँ

  • सबल- स्वस्थ हो देश

    सबल- स्वस्थ हो देश।।   योग भगाए रोग सब, करता हमें निरोग। तन-मन में हो ताजगी, सुखद बने संयोग।। योग साधना जो करे, भागे उसके भूत। आलस रहते दूर सब, तन रहता मजबूत।। खुश रहते हर पल सदा, जीवन में वो लोग। आत्म और परमात्म का, सदा कराते योग।। योग करें तो रोग सब, भागे…

  • चाभी | Kavita Chabhi

    चाभी ( Chabhi ) कौन कहता है ताले नहीं खुलते केन कहता है रास्ते नहीं मिलते चाभी खोजकर तो ज़रा देखिये तहखाने मे उतरकर तो देखिये हर चीज है मुहैया आपकी खातिर हर ताज के सिक्के बरामद होंगे कौन सी राजशाही चाहिए आपको आपके पुरे हर मुराद होंगे कम नहीं कुदरत के खजाने में आपको…

  • मुझे मिल गयी माँ

    मुझे मिल गयी माँ किसी को धरती मिली और,किसी को आकाश। मैं तो सबसे छोटा था तो, मुझे मिल गयी माँ। स्याह में भी टिमटिमाती, पूछती हर ख्वाब। शून्य में भी लग रहा था, पूरा था संसार। चमकता उज्जवल सा माथा, और चेहरा लाल। आंखों मे जितना ही ढूंढो, दिखता था बस प्यार। चेहरे की…

  • चिड़ियों से सीखें | Chidiyon se Sikhen

    चिड़ियों से सीखें चिडियों से सीखे हम वैज्ञानिक युग के विक्षिप्त विकसित कुत्सित मानव प्रेम-प्रीतिकी रीति गीत पेड़ की डाली की महकती चहकती दुनिया बेबस,बंटे,झुलसे,त्रस्त मानव को मुक्ति-मंत्र का संदेश जो हमें देते बहुजन हिताय की नीति बरबस हमें सिखाती द्रोह-भावना को मिटाती पाप,लाभ,लोभ-भोग की परवाह किए बिना सब मिल आशियां बनाते शेखर कुमार श्रीवास्तव…

  • मैं आपकी | Kavita Main Aap ki

    मैं आपकी ( Main Aap ki ) जनम -जनम का प्रीति जुड़ा है । सर्वस्व आपसे पूरा है ।। धर्म, हे प्रभु! आप निभाइए। सुमा के भी नाथ कहाइए।। मांग सिंदुरी नित सजती रहे। पाँव पैंजनियाँ बजती रहे ।। कंगन भी मैं तो खनकाऊँ। नित मैं आपकी ही कहाऊँ।। भक्ति- धारा सदा बहाइए। सुमा के…

  • मैं गंगा हूं | Kavita Main Ganga Hoon

    मैं गंगा हूं ( Main Ganga Hoon ) हिमालय की गोद में बस्ती हूं काटकर पहाड़ों को अपने साहस से सरल भाव में बहती हूं ऐसी मै गंगा हूं। लेकर सबको अपने साथ चलती हूं चाहे कंकड़ पत्थर रेत या पेड़ बंजर भूमि उपजाऊ बना दुं ऐसी मै गंगा हूं। प्यासे की प्यास बुझाती बिछड़ों…

  • अतुल्य भारत | Kavita Atulya Bharat

    अतुल्य भारत ( Atulya Bharat ) अतुल्य भारत, हिय प्रियल छवि सर्व धर्म समभाव छटा, स्नेह प्रेम भाईचारा अनंत । विविधता अंतर एकता, जीवन शैली संस्कार अत्यंत । खेती संग खुशहाली अथाह, परिश्रमी ओज सम रवि । अतुल्य भारत, हिय प्रियल छवि ।। दक्षिणी एशिया वृहत्तर राष्ट्र, पर्यटन क्षेत्र अति उत्तम । उत्तर शोभा दिव्य…

  • बड़प्पन से बड़े होते हैं

    बड़प्पन से बड़े होते हैं जो बड़े कद में हो गए ऊंचे ऊंचे पद पर हो गए। अंतर्मन विकार भरा हो तो स्वार्थ में जो खो गए। दिल दरिया सा जो रखते बड़प्पन से बड़े होते हैं। औरों की मदद जो करते लाखों हाथ खड़े होते हैं। वटवृक्ष की भांति देते सबको शीतल ठंडी छांव।…

  • कब बरसी सवनवाँ | कजरी

    कब बरसी सवनवाँ टप-टप चुवेला पसीनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। लुहिया के चलले से सूखेला कजरवा, ऊपरा से नीचवाँ कब बरसी बदरवा। गरमी से आवें न पजरवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। टप-टप चुवेला पसीनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। ताल-तलइया,नदिया,पोखरी सुखैलीं, अपने बलम के हम गोनरी सुतऊलीं। चिरई जुड़ाई कब खोंतनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। टप-टप…

  • मायका | Kavita Maayka

    मायका ( Maayka ) मायके का तो रगँ ही अलग है हर दिन एक मेला सा लगता है रिश्ते-नाते दोस्त पडोसी हर कोई मिलने आता है पल भर मे मिट जाती है थकान सफर की जब भाभी हाथो की चाय पिलाती है दो घूट भरते ही माँ की याद दिला जाती है खिल जाते है…