Lakshya par kavita

लक्ष्य पर संधान | Lakshya par kavita

 लक्ष्य पर संधान 

( Lakshya par sandhan ) 

 

रास्ता बहुत कठिन था हमारा
पर मंजिल पाना ज़रूरी था हमारा।

तलब थी यही इस मन में जो हमारी
कोई अनहोनी ना हो जाएं इच्छा थी हमारी।।

मज़बूत था इरादा और पक्का था हमारा वादा
जिन्दा पकड़ आएं तो ठीक नही तो फिर शूट।

देश आन्तरिक हिफाज़त जो हमें करना
फिर खून-खच्चर से हमको क्या डरना।।

काॅंटो का जंजाल और बीहड़ था सारा
विचलित करती आवाजें था गन्दा नाला।

पर हम बिलकुल भी नही घबराएं
खोज तलाश मे लगे रहे हम सारे।।

आँधी और तूफ़ान के बीच डयूटी थी हमारी
बादल बरसे बिजली कड़की छाई थी रात ॲंधेरी।

पथरीला था रस्ता कई बार पांव फिसला हमारा
पर हम बिलकुल भी नहीं घबराएं।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • दूधवाला | Kavita Doodhwala

    दूधवाला ( Doodhwala ) घर-घर आता सुबह शाम, ड्रम दूध के हाथों में थाम। दरवाजे पर आवाज लगाता, संग में लस्सी भी है लाता। सुबह-सुबह जल्दी है उठता, उठकर दूध इकठ्ठा करता। साफ- सफाई रखता पूरी, तोल न करता कभी अधूरी। मिलावट से है कतराता, दूध हमेशा शुद्ध ही लाता। आंधी, वर्षा, सर्दी, गर्मी, भूल…

  • भक्त से भगवान | Poem Bhakt Se Bhagwan

    भक्त से भगवान  ( Bhakt se bhagwan )   भक्त से भगवान का रिश्ता अनोखा होता हैl जब जब बजेगी बांसुरिया राधा को आना होता हैl द्रौपदी की एक पुकार पर वचन निभाना पड़ता हैl लाज बचाने बहना की प्रभु को आना पड़ता हैl मीरा के विश के प्याले को अमृत बनाना पड़ता हैl कृष्ण…

  • जीवन एक यात्रा | Kavita Jeevan ek Yatra

    जीवन एक यात्रा ( Jeevan ek yatra )  जीवन एक यात्रा है, सपनों का साज है, खुशियों की बगिया है, दुखों का भी राज है। उजालों की मस्तियाँ हैं, अंधेरों का ख्याल है, कभी-कभी कांटों की चुभन, कभी फूलों की माल है। राहें हैं कठिनाइयों की, संघर्ष का मैदान है, हिम्मत से जो चले यहाँ,…

  • प्रदूषण की समस्या | Poem on Pollution in Hindi

    प्रदूषण की समस्या ( Pradushan ki samasya )  हिन्दुस्तान में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली हैं प्रदूषण का आगाज़, मजहबी इमारतों में शोर गुल सूरज से पहले है प्रदूषण का आगाज़।। शादी-ब्याह हो या सियासतदानों की रैली जुलूस तो है प्रदूषण, कलश यात्रा, शोभायात्रा में बजते डीजे होती ऊंची आवाज़ तो प्रदूषण।। तीनों सूबों और नजदीक इलाकों…

  • बदलने से | Badalne se

    बदलने से हमको परहेज़ है साहब कहाँ बदलने से।कुछ न बदलेगा मगर बस यहाँ बदलने से। बात कोई नहींं करता वहाँ बदलने कीहम बदल सकते हैं सचमुच जहाँ बदलने से। न दिल, न जज़्बा, न लहजा, न नज़रिया, न नज़रकुछ बदलता नहीं है चेहरा बदलने से। सर झुकाने के तरीके के सिवा क्या बदलादिल बदलता…

  • कशिश | Kavita

    कशिश ( Kashish )   एक कशिश सी होती है तेरे सामने जब मैं आता हूं दिलवालों की मधुर बातें लबों से कह नहीं पाता हूं   मन में कशिश रहने लगी ज्यों कुदरत मुझे बुलाती है वर्तमान में हाल बैठकर दिल के मुझे सुनाती है   प्रकृति प्रेमी बनकर मैं हंसकर पेड़ लगाता हूं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *