Thaharaav

ठहराव |Thaharaav

ठहराव

( Thaharaav )

 

मुझे तो चलना ही होगा
आप चले या ना चलें
आपके खातिर मैं रुक नहीं सकता
हालांकि आपको छोड़ना भी नहीं चाहता

सफर दूर का है फासला बहुत है
भरोसा नहीं कल के फजर का
मगरिब से पहले पहुंचना है मुकाम तक
चलना है मुझे इसी जिद्दी से

भरम पालकर बैठे हैं आप
अपना भी वक्त आएगा की उम्मीद में
वक्त खुद से भला पुकारेगा क्यों आकर
उसे तो आपको ही माकूल बनाना होगा

चलता हुआ देखकर साथ हो लेंगे लोग
करेगा नहीं कोई इंतजार आपका
सभी के अपने दायरे हैं मुखातिब
आपके तो फैसला ही अभी बाकी हैं

ठहरने से ठहरता ही नहीं, मर जाता है कल
कल के लिए आज की जिंदगी जरूरी है
सांस तो मिली है गिनती की ही
आज हो या कल ,आप उन्हें बढ़ा नहीं सकते

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

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