पुरस्कार मिले या तिरस्कार

पुरस्कार मिले या तिरस्कार

पुरस्कार मिले या तिरस्कार

 

यथार्थ की धरातल पर

खड़े होकर ,

सच को कर लूँगा स्वीकार

पुरस्कार मिले या तिरस्कार |

 

ना कभी डगमगाऊंगा ,

कभी नहीं घबराऊंगा ,

झंझावातों से टकराऊंगा ,

मजधारों से हाथ मिलाऊँगा ,

हिम्मत नहीं मैं हारूँगा |

सब कुछ कर लूँगा स्वीकार ,

पुरस्कार मिले या तिरस्कार |

 

अन्याय नहीं सह पाऊँगा

चाहे मैं टूट जाऊँगा |

करके कुछ मिशाल बनूँगा

दुनिया के लिए मशाल बनूँगा |

धरती मेरी अपनी माँ है

माँ के लिए मैं ढाल बनूँगा |

दुश्मन खातिर तलवार बनूँगा |

सब कुछ कर लूँगा स्वीकार |

पुरस्कार मिले या तिरस्कार |

 

जाति पाति के झगड़ों से

मजहबी  रगड़ो  से ,

अपने आपको दूर करूँगा

सबके दिल में प्यार भरूँगा |

मानव बनकर जीऊँगा

मानव बनकर मर जाऊँगा |

सब कुछ कर लूँगा स्वीकार |

पुरस्कार मिले या तिरस्कार  !

 

गीत प्रेम के गाऊँगा

जागूँगा और जगाऊँगा |

द्वार द्वार मैं जाऊँगा

सबको यही बताऊँगा |

ईश्वर है सबका एक

ईश्वर है सबका एक |

फिर , सब कुछ कर लूँगा स्वीकार |

पुरस्कार मिले या तिरस्कार |

 

?

लेखक :– एम. एस. अंसारी (शिक्षक)

गार्डन रीच रोड़
कोलकाता -24 ( पश्चिम बंगाल )

यह भी पढ़ें : 

बेटियों को मजबूर नहीं मजबूत बनाइए

Similar Posts

  • शुक्र है | Shukar hai

    शुक्र है ( Shukar hai )    बेशक,लगी है आग कस्बे और मुहल्ले मे लेकिन,खुदा का शुक्र है आग हमारे घर से अभी दूर है…. बांध रखे हैं संविधान के बांध हमने खड़े कर दिए हैं सैनिकों के जंगल सुरक्षा कर्मियों की नहरें हैं आग तो बुझ जायेगी उनसे ही खुदा का शुक्र है आग…

  • वो दिलों में फासला हरदम यूं लाते ही रहे

    वो दिलों में फासला हरदम यूं लाते ही रहे     वो दिलों में फासला हरदम यूं लाते ही रहे । तोङ सारे ख्वाब दिल के रोज ढाते ही रहे।।   दिल में बैठाया हमेशा ही यकीं हमने किया। गैर के जैसे सदा वो पेश आते ही रहे ।।   प्यार की बातों को मेरा…

  • फुर्सत के पल | Fursat ke Pal

    फुर्सत के पल ( Fursat ke pal )    फुर्सत के पल मिल जाए आओ मीठी बात करे। हंस-हंसकर हम बतलाए एक नई मुलाकात करें। लो आनंद हंसी पलों का उमंगों का संचार करो। फुर्सत के पल सुहाने खुशियों का सत्कार करो। याद कर लो जरा उनको वक्त पड़े जो काम आए। बुलंदियों को पहुंचाया…

  • हमारे नेता जी

    हमारे नेता जी 23 जनवरी 1897 को कटक उड़ीसा में जन्म हुआ,जो पढ़ लिखकर अपने कला कौशल से अंबर छुआ।पिता जानकी नाथ बोस मां प्रभावती का पुत्र था जो,आजाद हिंद फौज बनाई और जय हिंद का नारा दिया।। देखकर भारत मां की दुर्दशा को बौखला गए नेताजी,1942 में आजाद हिंद फौज का गठन किए नेताजी…

  • उठ जागो मेरे भगवान | Uth Jaago mere Bhagwan

    उठ जागो मेरे भगवान ( Uth jaago mere bhagwan )   उठ जागो…उठ जागो…उठ जागो, उठ जागो मेरे भगवान, उठ जागो। तेरे द्वार खड़ा मैं इंसान, उठ जागो, मेरे निकल ना जाएं प्राण, उठ जागो। मेरी जान में आ जाएं जान, उठ जागो, उठ जागो मेरे भगवान…।।1।। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में, देवशयनी पावन…

  • हिन्दी की बात | Hindi ki Baat

    हिन्दी की बात ( Hindi ki Baat ) कहने कोहम हिन्दी को बहुत मानते हैंऔर बच्चों का प्रवेशअंग्रेजी माध्यम में करवाते हैं।ओ! दोहरी मानसिकता के लोग,मातृभाषा से दूर रहकरबच्चे का विकास होगा क्या?मातृभाषा तो सहज हीहर शिशु सीख लेता है,तो हम उस बस्ते के बोझ के साथक्यों अंग्रेजी का बोझ डालें?हिन्दी को जीवन काक्यों ना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *