कविताएँ

  • पानी पूरी | Kavita Pani Puri

    पानी पूरी ( Pani Puri ) देखते ही जी ललचाए मुंह में पानी गजब आए तीखी , खट्टी ,चटपटी सी मीठी मीठी चटनी के साथ खाए बिन रहा ना जाए ।। भूख में और लगती ये स्वादिष्ठ आलू मसाला डालकर फुटकी झट से भूख को मिटाने वाली पानी – पूरी यह कहलाती है ।। जगह…

  • कैनवस के पास | Kavita Canvas ke Paas

    कैनवस के पास ( Canvas ke Paas ) कैनवस पर तस्वीर बनाते समय ‘कैनवस के पास’ सिर्फ़ रंग और ब्रश ही नहीं बिखरे होते और भी बहुत कुछ होता है- तुम्हारी यादें , टूटे सपनों के टुकड़े, गुज़री मुहब्बत पानी की बोतल, नज़दीक का चश्मा, पीले पत्ते… धूप, कुर्सी, घास, बड़ी छतरी , कैप, पैन,…

  • कजली तीज | Kavita Kajli Teej

    कजली तीज ( Kajli Teej ) देखो आया कजली (सत्तू) तीज का त्यौहार सखियां सब हो जाओ तैयार मेहंदी हाथों में रचाई करके सोलह श्रृंगार आई हरी- हरी चूड़ियां खनखन करती पायल भी छम छम है बजती बिंदिया की चमक अपार स्वस्थ रहे पिया खुशियों से भरा हो संसार सुहागिनें मंदिर में दर्शन को जाती…

  • किस मूरत को हम पूजे

    किस मूरत को हम पूजे किस मूरत को हम पूजे, जिसमें प्राण प्रतिष्ठा है। या मन मन्दिर में मेरे जो, जिसमें मेरी निष्ठा है।।१ बिना प्राण की मूरत पूजे,क्या मुझको फल देगी । मेरी विनय पुकार सुनेगी, मेरे कष्टों का हल देगी।।२ जिस मूरत में प्राण भरा है ,वह मूरत क्या सच्ची है । जिसमें…

  • शंख नाद | Kavita Shankh Naad

    शंख नाद ( Shankh Naad ) माताओं, बहनों, बालाओं, तैयार हो जाओ ललनाओं, अब गूंज उठा है शंख नाद, हथियार उठाओ ललनाओं, मांगा अधिकार गगन मांगी, जब उफ है किया देहरी लांघी, फिर सबल भी कंधों को कर लो, अब अबला मत कहलाओ, अब गूंज उठा है शंख नाद, हथियार उठाओ ललनाओं, सदियों से बनी…

  • क्या तुम कभी | Kavita Kya Tum Kabhi

    क्या तुम कभी? ( Kya tum Kabhi ) हाँ, तुम मुझे जानते हो…, पर अगर प्रश्न करूँ, कितना जानते हो…? तुम अनमने से हो जाते हो, बहुत सोचते हो, पर जवाब क्या है? कुछ आदतों को बताते हो, पर स्त्रीत्व को नहीं समझ पाते हो। एकांत क्या है, यह स्त्री से पूछो। आदतों और व्यवहार…

  • श्री मज्जयाचार्य जी का 144 वां प्रयाण दिवस

    श्री मज्जयाचार्य जी का 144 वां प्रयाण दिवस तेरापंथ के गणमाली , महानता के आसन पर आसीन , विनय शिरोमणी , भव्य आत्माओ के भीतर संयम का दीप जलाने वाले , अध्यात्म तत्व वेता , समत्व योग के मूर्तिमान आदर्श श्री मज्जयाचार्य जी के चरणो में मेरा शत्-शत् वन्दन ! आज के इस अवसर पर…

  • याद शहीदों की | Kavita Yaad Shahidon Ki

    याद शहीदों की ( Yaad Shahidon Ki ) महा-समर में भारत के वीरों ने , प्राणों की भेंट अपनी चढ़ाई है बलिदानी हुए हैं सभी वो वीर , जिन्होंने सीने पर गोली खाई हैं।। पन्द्रह-अगस्त के दिन हम सब, देश की आजादी-पर्व मनाते हैं। जन-गण-मन राष्ट्र-गान गाकर, हम ध्वज हम अपना फहराते है।। भारत की…

  • आगे से | Kavita Aage Se

    आगे से ( Aage Se ) वचन लिया हमने भइया से, कच्चे सूत के धागे से, करो हमारी रक्षा भईया, बढ़कर तुम ही आगे से, देखो डिग ना जाना भाई, तुम अपने इस वादे से, इल्ज़ाम न लेना सिर कोई, वचन निभाना आगे से, भाई-बहना के बीच भले, तकरार कोई भी हो जाए, अहंकार मत…

  • आया रक्षाबंधन का पर्व | Kavita Aaya Rakshabandhan ka Parv

    आया रक्षाबंधन का पर्व ( Rakshabandhan ka Parv ) आया सावन का महीना राखी बांधने आई प्यारी बहना सावन की मस्ती भरी फुहार मधुर संगीत गुनगुनाती मेघो की ढोल ताप पर मां वसुंधरा भी मुस्काती तोड़े से भी ना टूटे जो ये ऐसा मन का बंधन ऐसे प्यारे बंधन को दुनिया कहती रक्षाबंधन तुम भी…