कविताएँ

  • मेघ | Kavita Megh

    मेघ ( Megh ) मेघ तुम इतना भी ना इतराना जल्दी से तुम पावस ले आना बारिश की बूंद कब पड़ेंगी मुख पर, तुम मेघ अमृत को जल्दी बरसाना ।। तरस रहे सभी प्राणी ये जग जीवन करते हैं तुम्हारा मिलकर अभिनंदन आजाओ हम बाट निहारें कब से मेघ मल्हार राग भी तुमसे ही सारे…

  • वे जीवित ही मरते

    वे जीवित ही मरते कर्मशील जीवित रह कर के, हैं आराम न करते। नहीं शिकायत करता कोई, मुर्दे काम न करते। जीवन का उद्घोष निरन्तर, कर्मशीलता होती। कर्मक्षेत्र में अपने श्रम के, बीज निरंतर बोती। है शरीर का धर्म स्वेद कण, स्निग्ध त्वचा को कर दें, अकर्मण्यता ही शय्या पर, लेटी रह कर रोती। जो…

  • हम पंछी उन्मुक्त गगन के | Hum Panchi Unmukt Gagan ke

    हम पंछी उन्मुक्त गगन के ( Hum Panchi Unmukt Gagan ke ) धूप की पीली चादर को, हरी है कर दें, तोड़ के चाॅद सितारे, धरती में जड़ दें, सब रंग चुरा कर तितली के, सारे जहाॅ को रंगीन कर दें, हम पंछी उन्मुक्त गगन के, उड़ें उड़ान बिना पंखों के, अपने काल्पनिक विचारों को,…

  • कुदरत का करिश्मा | Kavita Kudrat ka Karishma

    कुदरत का करिश्मा ( Kudrat ka Karishma ) नीचे ऊपर के मिलन से देखो बारिस हो रहा। बदलो का पर्वतो से देखो टकराना हो रहा। जिसके कारण देखो खुलकर वर्षा हो रहा। स्वर सरगम के मिलन से देखो वर्षा हो रहा।। गीत मल्हार के सुनकर खुश हो रहे इंद्रदेव। और खुशी का इजहार कर रहे…

  • किताबें खुशबू देती हैं | Kavita Kitaben Khushboo Deti Hai

    किताबें खुशबू देती हैं ( Kitaben Khushboo Deti Hai ) किताबें खुशबू देती हैं जीवन महका देती हैं l किताबों में समाया ज्ञान विज्ञान l किताबों का जग करे गुण~गान l किताबों ने निर्मित की है जग में विभूति महान l अकिंचन कालिदास, सूर, तुलसीदास नभ में चमके भानु समान l किताबें गुणों भरी है…

  • कागा कारवां | Kaga Karvan

    हिंदी है हम हिंदी है हम हिंदी राष्ट्र भाषा हमारी लिखना पढ़ना हिंदी में राष्ट्र भाषा हमारी हिंदी आन बान शान जान ज़ुबान आलीशान रोम रोम में बहती धारा भाषा हमारी हर शब्द में प्रेम की ख़ुशबू पावन कल कल करती रस धारा भाषा हमारी बोल चाल में खिलते दिल के कंवल आनंद की चलती…

  • बचपन लौटा दो | Kavita Bachpan lauta do

    बचपन लौटा दो ( Bachpan lauta do ) मुझे मेरा बचपन लौटा दो, बालपन का पौधा महका दो, आंगन की किलकारियां गुनगुना दो, दादी की पराती सुना दो, मां का आंचल ओढ़ा दो, पापा के खिलौने ला दो, बैग का बोझ घटा दो, कागज का नाव तैरा दो, कान्वेंट से गुरुकुल पहुंचा दो । एकलव्य…

  • ये बारिशें | Kavita Ye Baarishein

    ये बारिशें ( Ye Baarishein ) ये बारिशें धो रही हैं मैल अम्बर के मन का ये बारिशें भिगो रही हैं अंतस प्यासी धरा का ये बारिशें बदलने आईं हैं मौसमों के गर्म मिज़ाज ये बारिशें सुनाने आईं हैं फिज़ाओं को दिल का हाल ये बारिशें दिलों को ले चलीं हैं उन्माद की ओर कहीं…

  • मौसम ने | Mausam Ne

    मौसम ने ( Mausam Ne ) बदलते मौसम का अंदाज बहुत रंग ला रहा। वायू मंडल में घटाओं को जो बिखेर रहा। पेड़ पौधे फूल पत्ती आदि लहरा रहे है। और मंद मंद हवाओं से खुशबू को बिखर रहा।। नजारा देख ये जन्नत का किसी की याद दिला रहा। नदी तालाब बाग बगीचा भी अपनी…

  • मेरा भारत सबसे प्यारा | Kavita Mera Bharat Sabse Pyara

    मेरा भारत सबसे प्यारा ( Mera Bharat Sabse Pyara ) विश्व पटल गुरु पदवी, उद्गम स्थल सनातन धर्म । ऋषि मुनि वृंद तपोभूमि, श्रम निष्ठता सफलता मर्म । नैसर्गिक सौंदर्य मनभावन, परिवेश मानवता उन्मुख सारा । मेरा भारत सबसे प्यारा ।। अनूप संस्कृति स्नेहिल छटा, मर्यादा परंपरा जीवन दर्शन । तीज त्यौहार व्रत मनोरमा, रग…